
बेंगलुरु। कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने पर बुधवार को कर्नाटक विधानसभा में उनके सम्मान में ‘अभिनंदन नुडी’ प्रस्ताव लाया गया। हालांकि इस दौरान सत्तारूढ़ कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों की गैर-मौजूदगी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। सदन में कांग्रेस की कई बेंच खाली देखकर विपक्षी भाजपा और जेडीएस के सदस्यों ने आपत्ति जताई और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करने की मांग की।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद जब स्पीकर जी.एस. पाटिल अनंत नाग को बधाई देने के लिए प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे थे, तब सत्तापक्ष की तरफ बहुत कम विधायक मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस की ओर से केवल दो मंत्री और कुछ विधायक ही सदन में दिखाई दिए। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि इतने खाली सदन में अनंत नाग जैसी दिग्गज हस्ती को बधाई देना उचित नहीं है। उन्होंने इसे अभिनेता के सम्मान से जोड़ते हुए सत्तापक्ष की कम उपस्थिति की आलोचना की। अशोक ने स्पीकर से आग्रह किया कि कुछ समय के लिए सदन स्थगित किया जाए, ताकि अधिक विधायक पहुंच सकें और उसके बाद सम्मान प्रस्ताव पर चर्चा हो।
वरिष्ठ भाजपा विधायक सुरेश कुमार ने भी खाली बेंचों पर तंज कसा। उस दिन विधानसभा में सूखे के मुद्दे पर भी चर्चा होनी थी। इसी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में ही ‘सूखे’ जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। विपक्ष की आपत्ति के बाद विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित हुई।
विपक्षी विधायकों का कहना था कि अनंत नाग केवल कन्नड़ फिल्म जगत की बड़ी हस्ती नहीं हैं, बल्कि उनका कर्नाटक के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से भी संबंध रहा है। वह विधानमंडल के दोनों सदनों के सदस्य रह चुके हैं और जे.एच. पटेल सरकार में मंत्री भी रहे थे। इसी वजह से कई विधायकों ने मांग की कि उन्हें विधानसभा के भीतर ही सम्मानित किया जाना चाहिए।
अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके पांच दशक से अधिक लंबे योगदान के लिए वर्ष 2024 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को उनके नाम की घोषणा की थी। इसके बाद 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
अनंत नाग का जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक में हुआ था। उन्होंने थिएटर से अभिनय की शुरुआत की और बाद में फिल्मों में कदम रखा। अपने लंबे करियर में उन्होंने कन्नड़ के अलावा हिंदी, तेलुगु, मलयालम, तमिल और मराठी फिल्मों में भी अभिनय किया है। सरकारी जानकारी के अनुसार उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने के बाद अनंत नाग ने इस सम्मान को अपने सहयोगियों, दर्शकों और उन लोगों को समर्पित किया जिन्होंने उनके लंबे सिनेमाई सफर में साथ दिया। पुरस्कार ग्रहण करते हुए उन्होंने कर्नाटक को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताया और अपने अभिनय करियर में राज्य की भूमिका का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनंत नाग को इस सम्मान के लिए बधाई दी थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कई दशकों से उनके सहज अभिनय, बहुमुखी प्रतिभा और कलात्मक कौशल ने भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से कन्नड़ सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी है।
इसी उपलब्धि को देखते हुए कर्नाटक विधानसभा में ‘अभिनंदन नुडी’ के माध्यम से उन्हें बधाई देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन जैसे ही प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू हुई, सत्तापक्ष की खाली बेंचों का मुद्दा हावी हो गया। भाजपा और जेडीएस सदस्यों ने कहा कि ऐसे अवसर पर सदन में पर्याप्त संख्या में विधायकों की मौजूदगी होनी चाहिए।
विपक्ष के विरोध का मुख्य आधार यह था कि अनंत नाग के सम्मान को दलगत राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और सभी दलों के विधायकों की मौजूदगी में उन्हें बधाई दी जानी चाहिए। सत्तारूढ़ विधायकों की अनुपस्थिति को विपक्ष ने सम्मान की गरिमा से जोड़कर सरकार की आलोचना की। यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप था, जबकि सदन में प्रस्ताव का उद्देश्य अनंत नाग की उपलब्धि को औपचारिक रूप से सम्मानित करना था।
दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सरकारी फिल्म सम्मान है। अनंत नाग को यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में उनके योगदान और लंबे अभिनय सफर को देखते हुए दिया गया।
इस तरह अनंत नाग के सम्मान में शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस में बदल गई। विपक्ष ने कांग्रेस विधायकों की कम उपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि अनंत नाग की उपलब्धि को लेकर सदन में व्यापक सम्मान का भाव सामने आया। खाली बेंचों को लेकर हुआ विवाद बुधवार की विधानसभा कार्यवाही का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया।





